तेरे हृदय की पीड़ा का भान, बस एक तू हीं समझ पायेगा,
तेरे हृदय की पीड़ा का भान, बस एक तू हीं समझ पायेगा, जो व्यक्त किया औरों के संग, पात्र व्यंग्य का तू बन जाएगा। संवेदनशून्य हृदयों के मध्य, मृदु हृदय...
Hindi · Manisha Manjari · Manisha Manjari Hindi Poem · कविता · मनीषा मंजरी