“मां चंद्रघंटा”

माँ पार्वती का विवाहित रूप,है अवतार मां चन्द्रघंटा का।
जब सेअर्ध चन्द्र माथे पर सजाया,तब से चन्द्रघंटा कहलाती है।।
बाघिन उनका बना वाहन,हाथ मां अपने दस दर्शाती हैं।।
दाहिने हाथों में कमल,तीर,धनुष और माला,पांचवें हाथ में अभय मुद्रा अपनाती है।।
मां चंद्रघंटा का रूप शांति स्वरूपा,माथे अपने आधा चंद्र लगती हैं।।
आधा चंद्रमा और घंटा से मां,बुरी आत्माओं से अपने भक्तों को बचाती है।।
अपने घंटा की आवाज से मां, हजारों दुष्ट राक्षसों को मृत्यु देवता तक पहुंचाती हैं।।
राक्षसों का पल भर में करती संहार, मां पार्वती का रूप कहलाती है।।
मां का प्रिया भोग है खीर,भक्त बड़े भाव से भोग लगाते है।।
मां को पीले फूल वस्त्र सुनहरे भाते, रूप तब खिल खिल जाती है।।
जो भक्त आराधना सच्चे मन से करता, सौम्यता विनम्रता और निर्भयता का फल पाते है।।
सारे कष्टों से मां मुक्ति दे देती, और सहज ही परम पद का अधिकारी बना देती है।।
मधु गुप्ता “अपराजिता”
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