
तेरी तरहां मैं रूठ गया तो-------☺️
gurudeenverma198

"भूले हैं हम रफ़्ता रफ़्ता"
Madhu Gupta "अपराजिता"

अच्छी हूँ मैं कैद में , करो नही आजाद
RAMESH SHARMA

🙅सोचिएगा🙅
*प्रणय प्रभात*

सूरज क्यों गुस्से से लाल
Vindhya Prakash Mishra

*बाल कविता*-
Vindhya Prakash Mishra

वर्तमान के दौर में लोग धन की पावर दिखाकर बड़े बुजुर्गों के स
Rj Anand Prajapati

ईश्वर सत्य है
Santosh Shrivastava

..
*प्रणय प्रभात*

*"माँ कात्यायनी'*
Shashi kala vyas

हौसला रख
Vaishaligoel

छठा रूप माँ कात्यायनी
Dr Archana Gupta

जय माँ कात्यायनी
Dr Archana Gupta

संगिनी
AVINASH (Avi...) MEHRA

रात्रि
AVINASH (Avi...) MEHRA

मोहब्बत
AVINASH (Avi...) MEHRA

दोहा
Raj kumar

बोली लगा दी मैंने उन तमाम ख़्वाबों की।
Madhu Gupta "अपराजिता"

🙅दूसरी मीरा नहीं🙅
*प्रणय प्रभात*

सीता स्वयंवर
डॉ. शिव लहरी

"महाराणा प्रताप" किसी की गुलामी से कहीं अच्छा है कि, उससे लड़
ललकार भारद्वाज

यात्रा बेटी की
Dr. Ravindra Kumar Sonwane "Rajkan"

मीठी जबान जरूरी नहीं प्यार जताने के लिए,
पूनम झा 'प्रथमा'

शपथपत्र
Varun Singh Gautam

अब जरुरत नहीं कि, फुर्सतें ख़ास लेकर आओ तुम,
Manisha Manjari

मन क्या है ?
भविष्य त्रिपाठी

हे सत्य पथिक
भविष्य त्रिपाठी

मीठा आम
भविष्य त्रिपाठी

महास्वारथ
भविष्य त्रिपाठी

धुंधली सी नजर आती है, आईने में तस्वीर तो क्या।
श्याम सांवरा

मसरूफ़ तुम बहुत हो नफ़रतों की भीड़ में
Dr fauzia Naseem shad

सेना की शक्ति
भविष्य त्रिपाठी

🙅आज के दौर में🙅
*प्रणय प्रभात*

आंसू भरी आंखें, सूखा गला, मुस्कुराहट विहीन चेहरा, जुबान पर ए
पूर्वार्थ देव

अपार संभावनाएंं हैं इस दुनियां में...
Ajit Kumar "Karn"

🙅खरी-खरी🙅
*प्रणय प्रभात*

Eyes with tears, dried throat, smileless face, having tongue
पूर्वार्थ देव

धन या ध्यान। ~ रविकेश झा
Ravikesh Jha

****अनगर्जियाँ****
सुखविंद्र सिंह मनसीरत

घर·घर में अब विभिषण सारे लोग हो गए
सुखविंद्र सिंह मनसीरत

दोहा त्रयी. . . . . प्यार
sushil sarna

*प्रेम और वासना क्या है ? जाने असलम सर से।
Aslam sir Champaran Wale

If we are not successful then how much we studied will have
Aslam sir Champaran Wale

प्रेम और वासना क्या है। ~ रविकेश झा
Ravikesh Jha

बिना ग्लिसरीन
*प्रणय प्रभात*

पच्चत्तर की दहलीज!!
Jaikrishan Uniyal

*शातिर बिचौलिया*(जेल से)
Dushyant Kumar

भूल गए हम रफ़्ता रफ़्ता ज़ख़्म पुराने आहिस्ता आहिस्ता।
Madhu Gupta "अपराजिता"

तू ख़ुदा के हुक़्म की तामील तो अच्छे से कर
Shivkumar Bilagrami

हम अपना दर्द बांटें या ना बांटें पर हंसी बांटें
ARVIND KUMAR GIRI