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* प्यार *

Neelam Ji प्यार कहता मैं सच्चा साथी तेरा तू ये माने ना । प्यार कहता मैं रहता तुझमें तू ये जाने ना । प्यार कहता मैं बहता तुझमें लगा ले गोता [...]

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“प्यासा सावन”

Dr.rajni Agrawal
"प्यासा सावन" *********** मरुधर से निर्मम जीवन में अंगारों के पार [...]

✍✍वैभवशाली भारतीय संस्कृति✍✍

Abhishek Parashar
सुन्दर उपवन, अंवराई की छाया में, एक सुकुमार बैठा, शंका के साया [...]

बदबू

Bikash Baruah
बदबू आ रही है आज मानव शरीर से उसके पसीने की नही उसके पाप कर्मों [...]

ज़िंदगी के सफ़हात …

sushil sarna
ज़िंदगी के सफ़हात ... हैरां हूँ बाद मेरे फना होने के किसी ने मेरी [...]

कोयला

Bikash Baruah
कोयला काला है उससे नफरत करते सभी सामने भी उसके जाते नही काले पर [...]

आदमी

Bikash Baruah
आदमी आदमी से परेशान खो दिया इंसानों ने सोचने की ताकत जुल्मों की [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
क्यों तेरी तमन्नाओं से मैं छिपता रहता हूँ? क्यों अपनी बेबसी को मैं [...]

मैं और तुम

प्रतीक सिंह बापना
हम कुछ बिना सोचे समझे से हैं तय किये बिना ही मिले से हैं मैं और तुम [...]

*** दो मुक्तक ***

भूरचन्द जयपाल
27.6.17 दोपहर। 3.23 रेत के समंदर - सा सूखा ये दिल मेरा अधूरी - प्यार [...]

शरीर

Bikash Baruah
गली के चौराहे पर फटे पुराने पोशाक में खड़ी है अपने साथ शरीर को [...]

…………….भागीरथ की मैं गंगा ……………

रागिनी गर्ग
भागीरथ की मैं गंगा कहूँ किससे अपनी पीर? पाप, मनुज तेरे धो -धो हुआ [...]

महाकाल दर्शन

जगदीश लववंशी
आये कर शिप्रा स्नान, किया प्रभू का गुणगान, दर्शन के लिये हम खड़े, पल [...]

तन्हाई

Rita Yadav
कैसी तन्हाई बसी है इस भरी महफिल में लबों पर मुस्कान हैl दर्द भरा [...]

** माँ **

Neelam Ji
जब से होश संभाला मैंने , माँ तुमको ही जाना है । दुनिया चाहे जो भी [...]

हरिहर हरिहर जाप

RAMESH SHARMA
मुख मे तो हरिओम है,मन मे लेकिन पाप ! फिर तो तेरा व्यर्थ है, [...]

ड्रग्स रोक

Maneelal Patel
26 जून मादक द्रव्यों के इस्तेमाल और अवैध व्यापार पर रोक दिवस पर [...]

अश्रुनाद

Dr Chandra
. .... मुक्तक .... सावन बदली जब आती तब विरह रागिनी गाती उर [...]

मुक्तक

MITHILESH RAI
आज फिर मौसम में नमी सी आ रही है! जिन्दगी में तेरी कमी सी आ रही है! आ [...]

✍✍💥दो कौडी की राजनीति💥✍✍

Abhishek Parashar
दलित शब्द की गूँज का मचा है हाहाकार, मीरा को टक्कर देगी, कोविंद की [...]

आव बैठ ले मजले कक्का (बुंदेली कविता)

ईश्वर दयाल गोस्वामी
आव बैठ ले मजले कक्का तुमसें मिलें जमानों हो गव । ऊँसयी सूके कुआ [...]

अभिशाप कहे

Rita Yadav
अभिशाप कहे संताप कहे या इसको कोई पाप कहे जहां दो वक्त की रोटी [...]

पिता आपकी याद में…

सतीश तिवारी 'सरस'
पिता पर केन्द्रित तीन कुण्डलिया छंद (1) पिता आपकी याद में,गुज़रें [...]

मोहन समझो मन की पीर

Rita Singh
मोहन समझो मन की पीर तुम बिन कैसे धरु मैं धीर । दिन रैना दर्श की [...]

नहीं जगाना चाह….

सतीश तिवारी 'सरस'
अन्तर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस (26 जून) प्रसंग पर (तीन कुण्डलिया [...]

** मंजर मौत का ***

भूरचन्द जयपाल
मंजर मौत का देखकर यह ख़ंजर भी डर जायेगा सब्रकर ख़ुदा के बन्दे ख़ुद [...]

लेख

Brijpal Singh
बड़ी बिडंमना है साहब ... सच से क्यों मुँह मोड़ते हैं लोग यहाँ ? मुझे [...]

जाता नहीं ( शीर्षक )

Brijpal Singh
कभी-कभी सोचता हूँ चुप ही रहूँ मगर चुप मुझसे रहा जाता नहीं... हो रहे [...]

बेटी की अभिलाषा

Rita Yadav
पढ़-लिखकर कुछ करना चाहूं भेदभाव का खंडहर ढाहूं खुले आसमां के [...]

मेरा जीवन (कविता)

Onika Setia
मेरा जीवन (कविता) यह जीवन भी कोई जीवन है , [...]

नवगीत

शिवानन्द सिंह 'सहयोगी'
**मजूरी पेट होती है** कमाती और खाती है मजूरी पेट होती है कहीं है [...]