“कल सुबह होगी मुलाकात”

खट्टी मीठी बातों की,बना लेना तुम एक किताब।
कल सुबह होगी,तेरी मेरी मीठी सी एक मुलाकात।।
करवटों में ना बिताना, तुम काली लंबी ये रात।
अलसाई आंखों में साजना,कोई मीठा सा इक ख़्वाब।।
माना लंबी लगेगी तुमको, बरखा सी भीगती ये शाम।
पर सोंधी मिट्टी की खुशबू से,कर लेना तुम बातें चार।।
जब बुझने लगे घर के सारे चराग़,तन्हाई आ जाए तुम्हारे पास।
जाकर खिड़की के तुम पास,देखना चांद को चमकता तारों के साथ।।
मधु गुप्ता “अपराजिता”
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