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23 Jun 2021 · 1 min read

“मैं प्रभात का नवसृजन”

मैं प्रभात का नवसृजन; जीवनचक्र की परिभाषा,
नहीं रुकता समय का पहिया; बस उतरार्द्ध दर्शाता।
गर्भ में ले कल की गरिमा;
जो इस चक्र को समझ जाता,
पथ फिर निर्जन; चाहे निर्बल जितना;
काल की जय बस लिख जाता;
हाँ लिख जाता।
मैं प्रभात का……….नव सृजन ☀️

©दामिनी नारायण सिंह ☀️

Language: Hindi
3 Likes · 4 Comments · 495 Views
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