#महाकुंभ

#महाकुंभ पर मेरी #काव्यानुभूति 👇
प्रयागराज में भीड़ लगी,
भक्तों की आई टोली है।
गंगा, यमुना, सरस्वती की
संगम ही हमजोली है।।
हर हर गंगे बोल रहे सब,
महाकुंभ का मेला है।
नागा, संत, साधु, औघड़,
जनमानस का रेला है।।
अद्भुत दृश्य मनोहारी यह,
मस्तक सबके चंदन है।
प्रयागराज के महाकुंभ में,
सबका ही अभिनन्दन है।।
गुंजायमान नभ हो उठा,
जय श्रीराम जयकारा है।
नौका विहार, स्नान, भजन में,
डूबा जगत यह सारा है।
सायंआरती दृश्य अलौकिक,
दीपों का यह महासागर।
त्रिवेणी है पुण्यस्थली,
पुण्य कमाओ यहाँ आकर।।
मस्त मलंग साधु सन्यासी,
हाथ लिए सब चिलम है।
बेच रहे रुद्राक्ष, रत्न सब,
मोती, माणिक्य, नीलम है।।
चिमटा, लाठी हाथ लिए
सब घूम रहे यहाँ नागा है।
जगह-जगह यह धूनी रमाए,
भस्म शरीर पर लागा है।
शतक एक चौंवालीस वर्ष पे
महाकुंभ यह आया है।
अद्भुत, भव्य, दिव्य दृश्य,
देख जगत हर्षाया है।।
गंगा यमुुना सरस्वती का,
अतिपावन यह संगम है।।
पुण्य अर्जित करे यहाँ सब,
मानव रूप जो जंगम है।।
रात्रि दृश्य मनोहारी यहाँ,
जगमग तारों जैसी है।
भाई-बहनों आकर देखो,
मत पूछो यह कैसी है?
तेरह अखाड़े किये स्थापित,
आदि शंकराचार्य ने,
शैव, वैष्णव और उदासीन,
बांटे अन्य आचार्य ने।।
यज्ञ-हवन के कुंड बने हैं,
गंगा-यमुना के तट पर,
औघड़ की जमघट है लागी,
यहाँ बने हर मरघट पर।।
संतों का अनमोल प्रवाह,
आस्था का अद्भुत प्रवास।
शाही स्नान का बड़ा महत्व,
रचता धर्म नया इतिहास।।
दूर-दूर से भक्त हैं आये,
यह संगम अति पावन है।
ढोल, मजीरे, डमरू बजते,
दृश्य बड़ा मनभावन है।
भक्तों का लगा है तांता,
पुण्यस्थली ‘संगम’ है।
अंतःकरण शुद्ध करे सब,
करते योग विहंगम हैं।।
कुंभ मेला है एक सन्देश,
प्रेम, एकता, धर्म विशेष।
आओ मिलकर दृढ़ शपथ लें
मानवधर्म रहे ना शेष।।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
@स्वरचित व मौलिक
कवयित्री शालिनी राय ‘डिम्पल’✍️
आजमगढ़, उत्तर प्रदेश।