*आवारा कुत्तों को देखो, इनकी क्या शान निराली है (राधेश्यामी छंद/हास्य व्यंग

आवारा कुत्तों को देखो, इनकी क्या शान निराली है (राधेश्यामी छंद/हास्य व्यंग्य)
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1)
आवारा कुत्तों को देखो, इनकी क्या शान निराली है।
हर जगह दबदबा है इनका, कोई भी गली न खाली है।।
2)
डरते हैं मानव सब इनसे, बच-बच कर सदा निकलते हैं।
यह अगर सड़क पर बाऍं हैं, तो दाऍं पर सब चलते हैं।।
3)
हर गली-मोहल्ला इनका है, हर पार्क इन्हीं के नाम हुआ।
हर सुबह इन्हीं का राज हुआ, इनका शासन हर शाम हुआ।।
4)
रातों-भर गलियॉं इनकी हैं, चूॅं-चपड़ न कोई करता है।
जो इनके घुसे मोहल्ले में, बेमौत समझ लो मरता है।।
5)
इनकी दहशत वह क्या जानें, कारों में नित जो घूम रहे।
कुत्तों से खतरा उनको है, जो पैदल धरती चूम रहे।।
6)
जो पुलिस-फौज से घिरा रहा, कुत्तों से बस वह बच पाया।
इनसे खतरा बस उसे नहीं, जो बंदूकों के सॅंग आया।।
7)
इनके गुर्राने में खतरा, यह अगर काट लें खैर नहीं।
सबको कुत्तों ने काटा है, इनको अपना या गैर नहीं।।
8)
कुत्तों से दिक्कत अगर बंधु, हो तो भी कुछ कर कब पाऍंगे।
इनके अधिकार असीमित हैं, यह जमकर मौज मनाऍंगे।।
9)
तो करें प्रतीक्षा रखें धैर्य, इनकी नसबंदी होएगी।
तब तक सड़कें सब इनकी हैं, मानव-प्रजाति बस रोएगी।।
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रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज), रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615451