Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
14 Feb 2024 · 1 min read

उनकी जब ये ज़ेह्न बुराई कर बैठा

ग़ज़ल
उनकी जब ये ज़ेह्न बुराई कर बैठा
ये दिल मेरा हाथापाई कर बैठा

अच्छा बनना था अच्छाई कर बैठा
मैं रिश्तों में ख़ुद ही खाई कर बैठा

रोज़ मुझे वो बे-इज़्ज़त करता है अब
मैं उसकी इज़्ज़त-अफ़जाई कर बैठा

मुझ में लोग उतरने से कतराते हैं
क्यों ख़ुद में इतनी गहराई कर बैठा

आस्तीन में ख़ंजर रखने की लत में
मैं अपनी ही ज़ख़्मी कलाई कर बैठा

इक ही दीया रौशन था, मैं उसे बुझा कर
और ज़ियादा ही तन्हाई कर बैठा

मेरी दुनिया को करके बे-रंग ‘अनीस’
वो हरजाई दस्त-ए-हिनाई¹ कर बैठा

– – अनीस शाह ‘अनीस ‘

1. मेंहदी से सजे हाथ

Language: Hindi
1 Like · 181 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.

You may also like these posts

तुम जियो हजारों साल मेरी जान।
तुम जियो हजारों साल मेरी जान।
Rj Anand Prajapati
#सुनो___कैसी _हो ?
#सुनो___कैसी _हो ?
sheema anmol
एक सच ......
एक सच ......
sushil sarna
शेर-शायरी
शेर-शायरी
Sandeep Thakur
सब्ज़ियाँ(आलू की बारात)
सब्ज़ियाँ(आलू की बारात)
Dr. Vaishali Verma
मनवार
मनवार
जितेन्द्र गहलोत धुम्बड़िया
तेवरी
तेवरी
कवि रमेशराज
चलो जिंदगी का कारवां ले चलें
चलो जिंदगी का कारवां ले चलें
VINOD CHAUHAN
समय ⏳🕛⏱️
समय ⏳🕛⏱️
डॉ० रोहित कौशिक
प्राण प्रतिष्ठा
प्राण प्रतिष्ठा
आर एस आघात
👍👍
👍👍
*प्रणय प्रभात*
मौन
मौन
लक्ष्मी सिंह
"भेड़ चाल"
Khajan Singh Nain
"शौर्य"
Lohit Tamta
"इशारे" कविता
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
अव्यक्त भाव को समझना ही अपनापन है और इस भावों को समझकर भी भु
अव्यक्त भाव को समझना ही अपनापन है और इस भावों को समझकर भी भु
Sanjay ' शून्य'
जय मां शारदे
जय मां शारदे
Harminder Kaur
दीप
दीप
Karuna Bhalla
अंतहीन
अंतहीन
Dr. Rajeev Jain
ग़ज़ल
ग़ज़ल
आर.एस. 'प्रीतम'
नव वर्ष का स्वागत।
नव वर्ष का स्वागत।
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
ક્યારેક મને ફરી મળો
ક્યારેક મને ફરી મળો
Iamalpu9492
*नारियों को आजकल, खुद से कमाना आ गया (हिंदी गजल/ गीतिका)*
*नारियों को आजकल, खुद से कमाना आ गया (हिंदी गजल/ गीतिका)*
Ravi Prakash
"कैद"
ओसमणी साहू 'ओश'
Game bài Yo88
Game bài Yo88
yo88
वक्त पर जरूरत के मानिद आवाज़ बदलती देखी है
वक्त पर जरूरत के मानिद आवाज़ बदलती देखी है
दीपक बवेजा सरल
सार छंद विधान सउदाहरण / (छन्न पकैया )
सार छंद विधान सउदाहरण / (छन्न पकैया )
Subhash Singhai
अंजानी सी गलियां
अंजानी सी गलियां
नेताम आर सी
उमंग
उमंग
Akash Yadav
सीख का बीज
सीख का बीज
Sangeeta Beniwal
Loading...