भावना का कोई मोल नहीं
बिन सोचे समझे बोल नहीं
भावना का कोई मोल नहीं
यह संसार बड़ा निराला है
जुबान पर लगाता ताला है
दिखायें तो कैसे दिखायें हम
पांव में नहीं दिल में छाला है
दर्द को तराजू से तोल नहीं
भावना का कोई मोल नहीं
जीवन में दुख का अम्बार है
जैसे समुद्र का पानी खार है
कर मजबूत अपने मन को
खिजां को समझें बहार है
अपनों से टाल-मटोल नहीं
भावना का कोई मोल नहीं ।
मन की पीड़ा मन में रह जाये
कब आंसू बनकर बह जाये
जमाने तक दिल छलनी करे
बेवफा ऐसी बात कह जाये
क्या ये जीवन अनमोल नहीं
भावना का कोई मोल नहीं।
नूर फातिमा खातून “नूरी”
जिला -कुशीनगर