अपने
विरहा के बादल जब जब छाते है !
पंछी मेघ मल्हार उड़ उड़ के गाते है !!
रोता है आकाश घुमड़ घुमड़ कर !
जब अपने प्यारे मुंह मोड़ जाते है !!
• विशाल शुक्ल
विरहा के बादल जब जब छाते है !
पंछी मेघ मल्हार उड़ उड़ के गाते है !!
रोता है आकाश घुमड़ घुमड़ कर !
जब अपने प्यारे मुंह मोड़ जाते है !!
• विशाल शुक्ल