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24 Oct 2024 · 1 min read

आदाब दोस्तों,,,

आदाब दोस्तों,,,
दिनांक,,,24/10/2024
बह्र,,, 1212 – 1212 – 1212 – 1212 ,,
क़ाफिया __ आब, // रदीफ़ __ अब ,
***********************************
🌸गज़ल🌸
1,,,
हसीन पल बने सभी , मेरे खुदा कवाब अब ,
ये किस मुक़ाम पर क़याम है , नहीं जवाब अब।
2,,,
वो चाशनी में डूबते , उतर के चल दिये कहाँ ,
लबों को छू के लफ्ज़ भी हुए हैं लाजवाब अब ।
3,,,
गुज़र गयी वो शाम भी, किया था खूब काम भी,
गुनाह को उधेड़ कर , निकाले सब सवाब अब ।
4,,,
मिज़ाज सख्त हो गये , दिलों के दर खुले नहीं,
वो दौर अब चला गया ,रहे कहाँ नवाब अब ।
5,,,
वो ठाट-बाट खो गया , महल हुए हैं वो फ़ना ,
ज़मीं का रूप रंग भी ,चला गया रुबाब अब ।
6,,,
सभी को खुद की फिक्र है, नशे में जी रहे यहाँ,
जो दौर लालची बना , हुआ है खूँ खराब अब ।
7,,,
हक़ीक़तों से दूर हो के, ‘नील’ सब भटक गये ,
वो नेकियाँ मिटी हैं बस, बरस रहे अज़ाब अब ।

✍नील रूहानी,,24/10/22,,,
( नीलोफ़र खान )

क़याम_ पढ़ाव ,,,मुक़ाम _ स्थान ,,
अज़ाब ,,,दण्ड,,,

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