उम्मीदों का सूरज ढलने लगा है
अतीत के “टाइम मशीन” में बैठ
ग़ज़ल सगीर
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
मोहब्बत है अगर तुमको जिंदगी से
फल की इच्छा रखने फूल नहीं तोड़ा करते.
दो जून की रोटी
krishna waghmare , कवि,लेखक,पेंटर
*परिमल पंचपदी--- नवीन विधा*
रामनाथ साहू 'ननकी' (छ.ग.)
किसी अनजाने पथ पर भय जरूर होता है,
जन्मदिन की हार्दिक बधाई (अर्जुन सिंह)
हर बशर मुस्कुरा दे , ज़िंदगी कुछ करो तुम ,
घर बदला,रस्ता बदला और जमाना बदल दिया
सफलता और असफलता के बीच आत्मछवि- रविकेश झा
जिदंगी हर कदम एक नयी जंग है,