मालूम है तुमको यह

मालूम है तुमको यह, मत पूछना हमसे तुम।
तुम्हें देखते हैं क्यों, इस तरहां यार हम।।
मालूम है तुमको यह————————।।
यह गीत क्यों तुम, ऐसे गा रहे हो।
क्यों तुम ऐसे, हंसे जा रहे हो।।
काबू नहीं क्यों, अपनी अदायें।
पागल बनाते हो, किसको यहाँ तुम।।
मालूम है तुमको यह—————-।।
आँखों में क्यों यह, कजरा लगाया।
बालों में क्यों यह, गजरा लगाया।।
लहराते क्यों हो, तुम अपनी जुल्फें।
आकर करीब ऐसे, हमारे तुम।।
मालूम है तुमको यह—————।।
लगते हो बहुत तुम, हसीं इस दिल को।
बहुत प्यार है तुमसे, इस मेरे दिल को।।
मिलती हैं हमें खुशी, तुम्हें यूँ निहारकर।
करते हो इससे जब, दिल की बात तुम।।
मालूम है तुमको यह——————-।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)