मां दुर्गा देती खुशियां अपार,

मां दुर्गा देती खुशियां अपार,
आया हु जब से माता के द्वार।
मां जीवन में सबकी पालनहार,
जयकारे बोले हम बारम्बार।
शेर की सवारी हाथ में तलवार,
मां करती भक्तों का बेड़ा पार।
कुमकुम रोली व फूलों का हार,
नवरात्र में देखा मां का सिंगार।
लाल चुनर मेंहदी इत्र खुशबूदार,
मां की सदा होती जयजयकार।
पहाड़ा वाली सिंह पर सवार,
मां की ज्योति जले बारम्बार।
मंदिर में बजते घंटी करताल,
ध्वनि सुनो तो मिलता प्यार।
सर झुकाकर किया नमस्कार,
जब से लगा माता का दरबार।
सत्यवीर वैष्णव
बारां💞✒️💞