कब तक रोकेगे

जीवन में तूफान बहुत है
पग पग पे इम्तिहान बहुत है
ऐ ऊंची सपनों का मुसाफिर
चलना कदम कदम संभाले
तुम बादलों से डरना मत
ये कब तक तुमको रोकेगे
चमकने वाले सूरज को
भला बादल कब तक रोकेगे ।
चाहत है अंबर नापना
तो पथ से तुम घबराना मत
चाहत है अंबर नापना
तो सोच सोच के डरना मत
दुनिया दारी छोड़ के बस
तू अपना कृत्य ही करता जा…
चमकने वाले दीपक को
भला अंधियारा कब तक रोकेगे ।
जब रणभूमि में लड़ लड़ के
तू टूट जाएं जब अंतर्मन से
जब रणभूमि में लड़ लड़ के
तुम्हें हिम्मत न हो उठ पाने की
बस साहस कर एकबार उठना
तू मंजिल पूरा पाओगे
चमकने वाले सूरज को
भला बादल कब तक रोकेगे ।