वजह तो बताते

इनकार की वजह तो बताते तुम।
नाराजगी क्यूं है ये समझाते तुम।
बेवफाई की ,या लड़ाई की हमने
कोरे कागज़ पे ख़ता लिखवाते तुम।
बात बेबात पे , ख़फ़ा होते हो क्यूं
आदत है या अकड़ हो दिखाते तुम।
माफ़ी तुमसे हम , मांगने वाले नहीं
ज़रूरत में तो, हो आंखें बिछाते तुम।
देखो ये पल लौट कर नहीं आने वाले
अच्छा होता,समय रहते समझ पाते तुम।
सुरिंदर कौर