पुत्र दिवस

पुत्रों की महिमा का वर्णन कहीं किया नहीं जाता है।
माता संग पुत्र का रिश्ता हमेशा सहज बताया जाता है।।
पिता पुत्र के भविष्य की खातिर सख़्ती जहाँ दिखलाता है।
पुत्र पिता की सख्ती के कारण ही पिता से सहज नहीं हो पाता है।।
पुत्र ही है जो पिता से कभी भी लाड़ लड़ा नहीं पाता है।
और पिता के सामने भूल से भी कोई गलती नहीं कर पाता है।।
पिता की सख्ती के कारण ही पुत्र जीवन में सफलता पाता है।
आगे चलकर वह अपने माता-पिता को हर सम्मान दिलाता है।।
हर पुत्र जगत में अपने पिता की परछाईं ही तो बतलाया जाता है।
बनने के बाद ख़ुद पिता पुत्र को पिता का रिश्ता समझ में आता है।।
कहे विजय बिजनौरी पिता का अपने पुत्र से अनोखा नाता है।
जिसका वर्णन कोई पिता अपने पुत्र से शायद ही कर पाता है।।
विजय कुमार अग्रवाल
विजय बिजनौरी।