सौंदर्य

सौंदर्य बहुत दूर तक जाता है
कभी खुली खिलखिलाहट में
ख़ाली पड़े दानपात्र को भरने में
अकेले रो रहे बच्चे को गोदी में उठाने में
या कभी
दोस्त के साथ बैठ
सुख दुख बांटने में
सौंदर्य का इतना फैलाव
नदी पहाड़ झरनों में
जो हर लें अकेलेपन को
और भर दें मन को अज्ञात से
विस्तृत सौंदर्य को ठुकरा
हम आज जहां पहुँचे हैं
क्या यही है वह रास्ता
जो ले जाएगा शांति की ओर?
—- शशि महाजन