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21 Jan 2025 · 1 min read

जीवन की बरसात में

पहली बार मिले थे जब हम जीवन की बरसात में।
दूर दूर बैठे थे फिर भी थे हम एक दूजे के साथ में।।
याद तुम्हारी जब आती है खुद को ही मैं समझाता हूँ।
दर्द मेरा फिर जाग उठेगा जब भी आयेगी वो मेरे पास में।।
आंखें जब जब बंद करूं मैं खड़ी दिखे वो मेरे साथ में।
पहली बार मिले थे जब हम जीवन की बरसात में।।
हसरत से मैं देख रहा हूं खड़ा हो छत पर आसमान में।
शायद फिर से देख सकूं मैं तुझको हर पल होती बरसात में।।
तेरी वो तस्वीर कहीं धुंधला ना जाये हमारी आँख में।
इसीलिए झपकी भी नहीं लगने देता हूं मैं अपनी आँख में।।

विजय कुमार अग्रवाल
विजय बिजनौरी।

Language: Hindi
36 Views
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