कुछ सवालात

कुछ मुलाकातें अधूरी रह जातीं हैं ,
कुछ बातें अनकही रह जातीं हैं ,
ज़ब्ते एहसास दिल में रह – रह कर सालता है ,
ज़ेहन मंडराते यादों के अब्र में बार-बार खो जाता है ,
दिल में बसी कशिश टीस बन उभरती है ,
कभी बुझती ,कभी जलती,
कभी कम से कमतर होती है ,
वक़्त की गर्दिश में हम उन्हें भूल नही पाते हैं ,
कुछ सवालों के जवाब ता-‘उम्र ना ढूँढ पाते हैं।