Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 Oct 2024 · 1 min read

बाहर के शोर में

बाहर के शोर में
अंदर की आवाज़ लुप्त है
औरों की ख्वाहिशें पूरी करते
आज खुद के जज्बात सुप्त हैं

चित्रा बिष्ट

137 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Chitra Bisht
View all

You may also like these posts

मानवता का सन्देश
मानवता का सन्देश
manorath maharaj
तनाव
तनाव
OM PRAKASH MEENA
"सत्य की परीक्षा"
Madhu Gupta "अपराजिता"
कमबख्त़ तुम याद बहुत आती हो....!
कमबख्त़ तुम याद बहुत आती हो....!
Kunwar kunwar sarvendra vikram singh
A Hopeless Romantic
A Hopeless Romantic
Vedha Singh
खैर-ओ-खबर के लिए।
खैर-ओ-खबर के लिए।
Taj Mohammad
बहते पानी पे एक दरिया ने - संदीप ठाकुर
बहते पानी पे एक दरिया ने - संदीप ठाकुर
Sandeep Thakur
हर खेल में जीत का आलम नहीं होता
हर खेल में जीत का आलम नहीं होता
दीपक बवेजा सरल
मैं हिंदी में इस लिए बात करता हूं क्योंकि मेरी भाषा ही मेरे
मैं हिंदी में इस लिए बात करता हूं क्योंकि मेरी भाषा ही मेरे
Rj Anand Prajapati
*SPLIT VISION*
*SPLIT VISION*
Poonam Matia
हिन्दी ही दोस्तों
हिन्दी ही दोस्तों
SHAMA PARVEEN
यायावरी
यायावरी
Satish Srijan
एक कहानी, दो किरदार लेकर
एक कहानी, दो किरदार लेकर
अभिषेक पाण्डेय 'अभि ’
😊😊😊
😊😊😊
*प्रणय प्रभात*
# उचित गप्प
# उचित गप्प
DrLakshman Jha Parimal
वर्तमान में बिहार में होने वाले शिक्षक स्थानांतरण की रूपरेखा
वर्तमान में बिहार में होने वाले शिक्षक स्थानांतरण की रूपरेखा
पंकज कुमार कर्ण
4712.*पूर्णिका*
4712.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
तुम बिन सूना मधुमास
तुम बिन सूना मधुमास
Sudhir srivastava
खुशी
खुशी
Phool gufran
"कछुआ"
Dr. Kishan tandon kranti
सच के दामन में लगे,
सच के दामन में लगे,
sushil sarna
नया साल कर जाए कमाल
नया साल कर जाए कमाल
Rajesh vyas
इम्तिहान
इम्तिहान
AJAY AMITABH SUMAN
एक यह भी सच्चाई है कि इंसान कि जैसे–जैसे समझ बढ़ने लगती है त
एक यह भी सच्चाई है कि इंसान कि जैसे–जैसे समझ बढ़ने लगती है त
पूर्वार्थ
छुपा कर दर्द सीने में,
छुपा कर दर्द सीने में,
लक्ष्मी सिंह
*खाकर नित पीली धूप सुखद, जाड़े का पर्व मनाऍं हम (राधेश्यामी
*खाकर नित पीली धूप सुखद, जाड़े का पर्व मनाऍं हम (राधेश्यामी
Ravi Prakash
मित्र
मित्र
Rambali Mishra
*प्रेम नगरिया*
*प्रेम नगरिया*
Shashank Mishra
प्रकृति (द्रुत विलम्बित छंद)
प्रकृति (द्रुत विलम्बित छंद)
Vijay kumar Pandey
मोल कोई
मोल कोई
Dr fauzia Naseem shad
Loading...