लक्ष्मी सिंह 1035 posts Sort by: Latest Likes Views List Grid Previous Page 5 Next लक्ष्मी सिंह 29 Jan 2022 · 1 min read सोच अगर अलग करना तुझे, रखो सोच कुछ खास । है मुश्किल कुछ भी नहीं,हो खुद पर विश्वास।।१ आस और विश्वास से,रखना सोच बुलंद। खुली सोच में ज़िन्दगी,पाती है आनंद।। २... Hindi · दोहा 1 215 Share लक्ष्मी सिंह 26 Jan 2022 · 1 min read गणतंत्र आया है गणतंत्र फिर, पहने नव परिधान। स्वागत में ऋतु राज भी, गाते मंगल गान।। गाते मंगल गान, प्रकृति करती अगुवानी। जड़ चेतन भी आज, स्वयं स्वागत की ठानी।। नवल... Hindi · कुण्डलिया 2 145 Share लक्ष्मी सिंह 24 Jan 2022 · 1 min read गुब्बारे वाला हाय गरीबी इस तरह,बनी गले की फाँस । गुब्बारे में कैद कर, चला बेचने साँस।।१ गुब्बारे में भर दिया, अपना सारा दर्द। बिखर गया हूँ टूट कर, जैसे पत्ते जर्द।।... Hindi · दोहा 1 657 Share लक्ष्मी सिंह 22 Jan 2022 · 1 min read पथरी का आयुर्वेदिक उपचार सबसे पहले पीजिए,निर्मल जल भरपूर। खान पान रखिये सही,होगा पथरी दूर।। १ खीरे का रस पीजिए, हर दिन एक गलास। लगातार ले बीस दिन, पथरी करें खलास।। २ चबा-चबा कर... Hindi · दोहा 2 2 229 Share लक्ष्मी सिंह 8 Jan 2022 · 1 min read अभिव्यक्ति 2212 2212 2212 22 छंद-माधुरी उर भावना अनुभूतियों का भान होता है, अभिव्यक्त कर पाना कहाँ आसान होता है । संवेदनाएं भावनाएं मूकदर्शक बन, आधात सहते पथ पथिक नादान होता... Hindi · ग़ज़ल/गीतिका · माधुरी छंद 2 3 254 Share लक्ष्मी सिंह 5 Jan 2022 · 1 min read जीवन जीवन कितना भी खारा है। सहर्ष इसको स्वीकारा है। हँसते हँसते इस जीवन में, हर दुख से किया किनारा है। प्रात काल की सूर्य किरण बन, गम के बादल को... Hindi · ग़ज़ल/गीतिका 2 1 323 Share लक्ष्मी सिंह 20 Jul 2021 · 1 min read जिस घर में--- जिस घर के खाने का जायका लजीज़ नहीं होता है। तन-मन स्वस्थ रहता कोई भी मरीज़ नहीं होता है। जिस घर में संस्कृति संस्कारों का पाठ पढ़ाया जाता- उस घर... Hindi · Quote Writer · मुक्तक 5 3 567 Share लक्ष्मी सिंह 20 Jun 2021 · 1 min read पिता आधार छंद-विधाता 1222 1222 ,1222 1222 पिता के रूप में सब देवता घर में तुम्हारे हैं । मनुज पहचान लो इनको प्रभु भू पर पधारे हैं। शिकन को देख माथे... Hindi · ग़ज़ल/गीतिका · विधाता छंद 8 4 472 Share लक्ष्मी सिंह 11 Jun 2021 · 3 min read बरसात 1) गीत शुन्य हृदय में प्रेम की,गहन जलद बरसात। गहन अँधेरा कर गयी, पावस की यह रात।। झुलस रही हूँ अग्नि-सी, बढ़ा दिया संताप। मुझ विरहण को यूँ लगे, दिया... “बरसात” – काव्य प्रतियोगिता · गीत · बरसात 8 8 382 Share लक्ष्मी सिंह 2 Apr 2021 · 1 min read आस करे तमाशा जिन्दगी, होना नहीं निराश। ऐसे में धीरज धरो ,रखों आस विस्वास।। १ आस और विस्वास को, हरदम रखना पास। जिन्दा रहता है वही,जिसमें होती आस।। २ कच्ची मिट्टी... Hindi · दोहा 8 10 501 Share लक्ष्मी सिंह 25 Mar 2021 · 1 min read मौन आधार छन्द रूपमाला (मापनी युक्त मात्रिक) 24 मात्रा , मापनी-गालगागा गालगागा गालगागा गाल । ध्रुव शब्द - मौन 2122 2122 2122 21 मौन होता साधना आनंद का आधार । आत्मा... Hindi · Quote Writer · मुक्तक 3 4 780 Share लक्ष्मी सिंह 19 Mar 2021 · 1 min read ऋतु राज पीली चुनर ओढ़ कर, आये हैं ऋतु राज पुलक उठा उपवन मगन, बजे प्रकृति के साज कलरव करते हैं विहग, गाते पंचम राग धरा सुसज्जित शोभती,स्वागत करती आज -लक्ष्मी सिंह... Hindi · Quote Writer · मुक्तक 2 3 353 Share लक्ष्मी सिंह 17 Mar 2021 · 1 min read आस और विश्वास। जैसे है तन के लिए, बहुत जरूरी स्वास । वैसे ही मन के लिए, आस और विश्वास।। आस और विश्वास,मनुज को जिन्दा रखता। भूले सारे दर्द,शहद खुशियों का चखता।। जो... Hindi · कुण्डलिया 3 4 533 Share लक्ष्मी सिंह 16 Mar 2021 · 1 min read मत्तगयन्द सवैया विधा- मत्तगयन्द सवैया छंद (वर्णिक) शिल्प विधान- 7 भगण+गुरु गुरु मापनी- 211 211 211 211 211 211 211 22 उक्त छंद में एक गुरु के स्थान पर दो लघु की... Hindi · मत्तगयंद सवैया · मुक्तक · वंदना · स्तुति 2 5 772 Share लक्ष्मी सिंह 3 Mar 2021 · 1 min read श्वान हुई श्वान से दोस्ती,पकड़ लिया है हाथ। मेरे संग-संग डोलता,सदा निभाता साथ।। अपनों ने छोड़ा हमें, मिला श्वान का साथ। सदा स्नेह से चूमता,सहलाता है माथ।। बेजुबान यह जानवर,समझे मन... Hindi · दोहा 2 2 472 Share लक्ष्मी सिंह 2 Mar 2021 · 1 min read प्रियवर अंतर मन में है बसा,प्रियवर तेरा चित्र। प्रेम वासना से रहित ,पावन परम पवित्र।। तेरी बाहों में सुबह,हो बाँहों में रात। दो नयना करती रहे,अंतर मन की बात।। सीने से... Hindi · दोहा · प्रेम 2 5 657 Share लक्ष्मी सिंह 2 Mar 2021 · 1 min read खोल नैन द्वार माँ। आधार छंद:-शिव 21 21 21 2 खोल नैन द्वार माँ। देख एक बार माँ। द्वार पर खड़ी सुता, हाथ को पसार माँ। हाथ जोड़कर पड़ी, दो असीम प्यार माँ। शीश... Hindi · ग़ज़ल/गीतिका · वंदना · शिव छंद · स्तुति 2 1 357 Share लक्ष्मी सिंह 1 Mar 2021 · 1 min read रचो महोत्सव रचो महोत्सव प्रीत का, फैले है बहुरंग । मैं बन जाऊँ राधिका,मिले श्याम का संग।। गोरे गोरे अंग पे, चढ़ा श्याम का रंग। मन रंगीला उड़ चला, जैसे उड़े पतंग।।... Hindi · दोहा · प्रेम 3 3 426 Share लक्ष्मी सिंह 28 Feb 2021 · 1 min read किसान धरती को माने माता,नित्य ही शीश नवाता,सबका ही अन्नदाता,देश का किसान है। रखता माटी से नाता,उससे सोना उगाता,पेट सभी का भरता,सबसे महान है । कड़ी धूप में जलता,सदा शीत में... Hindi · घनाक्षरी 3 2 275 Share लक्ष्मी सिंह 28 Feb 2021 · 1 min read किसान कपड़े है एक जोड़ी,घर में नहीं तिजौरी,पास नहीं फूटी कौड़ी,फिर भी ईमान है। नित अभावों में पला, भूख से पेट भी जला, सत्य पथ से न टला,देवता समान है। घर... Hindi · घनाक्षरी 309 Share लक्ष्मी सिंह 28 Feb 2021 · 1 min read प्रेम सुधा आधार छंद:-किरीट सवैया 211 211 211 211 211 211 211 211 प्रेम सुधा रसना जिसके उर में बहती रहती सरिता सम। नित्य निरंतर निर्मल पावन वो रहता मिटता उर का... Hindi · Quote Writer · मुक्तक 2 594 Share लक्ष्मी सिंह 27 Feb 2021 · 1 min read चलना सिखाया आपने पंथ में हो मौन सुमनों को बिछाया आपने । शूल सारे चुन लिए पथ को सजाया आपने। स्नेह का दीपक जला कर,संग मेरे हर घड़ी- हाथ मेरा थाम कर चलना... Hindi · Quote Writer · मुक्तक 1 1 470 Share लक्ष्मी सिंह 27 Feb 2021 · 1 min read अजनबी एक अजनबी शख्स से,मिली एक ही रात। आँखों आँखों में हुई, चाहत की हर बात। करवट बदला वक्त ने, छूटा उसका साथ- प्रणय मिलन की लालसा,मचा रहा उत्पात । लक्ष्मी... Hindi · Quote Writer · मुक्तक 1 272 Share लक्ष्मी सिंह 27 Feb 2021 · 1 min read दे कलम कटार माँ आधार छंद-शिव 21 21 21 2 दे कलम कटार माँ। तीक्ष्ण तेज धार माँ। दीप्त ज्योति ज्ञान की, दे हमें अपार माँ। दिव्य छंद ताल दे, भाव बेशुमार माँ। शब्द... Hindi · ग़ज़ल/गीतिका · भजन · वंदना · शिव छंद · स्तुति 4 327 Share लक्ष्मी सिंह 27 Feb 2021 · 1 min read जिंदगी नेह देकर ज़िन्दगी हर, पल सजाया आप ने। दर्द सारे हर लिया उर, से लगाया आपने । कल्पना की तूलिका से,रंग सारे भर दिये - मैं अकिंचन प्रेम से थी,पथ... Hindi · Quote Writer · मुक्तक 1 292 Share लक्ष्मी सिंह 26 Feb 2021 · 1 min read अजनबी नहीं जानती कौन हो,क्या है तेरा नाम। आये हो किस देश से,कहाँ तुम्हारा धाम । गले पड़े हो क्यों बता,नहीं जान पहचान- एक अजनबी शख़्स से,मुझे भला क्या काम। -लक्ष्मी... Hindi · Quote Writer · मुक्तक 1 1 211 Share लक्ष्मी सिंह 26 Feb 2021 · 1 min read प्रार्थना उपेंद्रव्रज्रा छंद 121 221 121 22 महेश देवेश त्रिशूलधारी । महाबली सत्य जयी बिहारी। दया करो हे प्रभु दीनदयाला, बने रहे भक्त सदा पुजारी। खड़े हुए हैं मुनि सेवकाई, लगा... Hindi · उपेंद्रव्रज्रा छंद · ग़ज़ल/गीतिका · प्रार्थना · भजन · वंदना 2 2 380 Share लक्ष्मी सिंह 25 Feb 2021 · 1 min read सेमल सेमल कल तक था खड़ा,यूँ ही नंग धरंग। प्रिय बसंत का आगमन,निखर उठा हर अंग।। हाड़-मांस को फोड़ कर,फूट पड़ा हर अंग। रक्त पुष्प बन कर खिला, दहक रहा है... Hindi · दोहा 3 2 580 Share लक्ष्मी सिंह 24 Feb 2021 · 1 min read वसंत कूंकती कोयल काली,बैठ आम की डाली,बावली ये मतवाली,करती पुकार है । खिले पुष्प डाली-डाली,सींचते जिसको माली,शोभित धरा निराली, बसंत बहार है। चारों ओर हरियाली, किरणों की उजियाली,मुख पर छाई लाली,... Hindi · घनाक्षरी 1 227 Share लक्ष्मी सिंह 23 Feb 2021 · 1 min read वसंत पुष्प भरा कोना-कोना,पहने हैं चाँदी सोना,कलियों का जादू-टोना,बसंत बहार है। गदराई गेहूँ बाली,बौराई आमवा डाली,सरसों बजाए ताली,झूमता तुषार है। ये दिव्य रूप सुन्दरी,ज्यों देव लोक की परी,छवि अति विभावरी,सोलह श्रृंगार... Hindi · घनाक्षरी 1 241 Share लक्ष्मी सिंह 23 Feb 2021 · 1 min read प्रात काल की शुद्ध हवा प्रात काल की शुद्ध हवा ******************* प्रात काल की शुद्ध हवा है। सबसे अच्छी एक दवा है। बलवर्धक सबसे हितकारी। सेहतमंद सदा गुणकारी। साँस-उसाँसे होती ताजा। रग-रग में तब बजता... Hindi · कविता · बाल कविता · हवा 4 1 712 Share लक्ष्मी सिंह 22 Feb 2021 · 1 min read जलने दो शब्दान्त- "जलने दो" प्रेम पावनी उर में पलने दो। कंटक पथ पर यूँ ही चलने दो। नहीं हमें अब परवाह किसी की - दुनिया जलती है तो जलने दो। १।... Hindi · मुक्तक 1 2 270 Share लक्ष्मी सिंह 21 Feb 2021 · 1 min read नशे में फिजा इस कदर हो गई। 122 122 122 12 नशे में फिजा इस कदर हो गई। नजर देख लो खुद नजर हो गई। बड़ा खुशनुमा हर नजारा लगे, किया इश्क़ जब से असर हो गई।... Hindi · ग़ज़ल/गीतिका 4 2 326 Share लक्ष्मी सिंह 21 Feb 2021 · 1 min read विरह/बसंत (1) विरह ताप से तप्त हृदय है लगता जीवन खार पिया । ऐसे में वसंत का आना लगता है अंगार पिया। व्याकुल अंतस चातक नैना विकल अश्रु दिन रात बहे-... Hindi · मुक्तक 2 1 600 Share लक्ष्मी सिंह 20 Feb 2021 · 1 min read बसंत आधार छंद-भुजंगप्रयात 122 122 122 122 हवा ये बसंती बहुत ही सुखद है । घुले प्राण मधुकर सुधा-सा शहद है। धरा है सुवासित खिले पुष्प सारे, भरा हर तरफ देखिये... Hindi · ग़ज़ल/गीतिका · बसंत · भुजंगप्रयात छंद 2 2 258 Share लक्ष्मी सिंह 20 Feb 2021 · 1 min read जिन्दगी नहीं हमें फुर्सत मिली, आया न तुझे ख्याल। गुजर गई जब जिन्दगी,करते रहें मलाल ।। साया बनकर थे कभी,जले धूप में साथ- दिले तमन्ना तोड़ कर,हैं दोनों बेहाल।। -लक्ष्मी सिंह... Hindi · Quote Writer · मुक्तक 2 357 Share लक्ष्मी सिंह 20 Feb 2021 · 1 min read विरहण आधार छंद - अहीर (मापनीयुक्त मात्रिक) विधान - 11 मात्रा, अंत में गाल, दोहे का सम चरण. समांत - ' आर ', अपदांत. ************************** गीतिका :- विरहण का संसार। फँसा... Hindi · अहीर छंद · ग़ज़ल/गीतिका · विरह · विरहण 1 312 Share लक्ष्मी सिंह 19 Feb 2021 · 1 min read अज्ञानता निर्धनता का मूल अक्षर से कर मित्रता,शूल बनेगा फूल। होती है अज्ञानता, निर्धनता का मूल।। १ मनुज गरीबी है बना, बहुत बड़ा अभिशाप। अर्जित करके ज्ञान को,करो दूर संताप।। २ शिक्षा-दीक्षा ताक पर,रखता... Hindi · दोहा 1 1 482 Share लक्ष्मी सिंह 19 Feb 2021 · 1 min read यामिनी बैरन हुईं है छंद - गीतिका समान्त 'अना' पदान्त मुझे 2122 2122 2122 212 यामिनी बैरन हुईं है आज फिर जगना मुझे। आज फिर से दीप बन कर रात भर जलना मुझे। सृष्टि... Hindi · ग़ज़ल/गीतिका · गीतिका छंद · विरह 1 237 Share लक्ष्मी सिंह 18 Feb 2021 · 1 min read तंग जिंदगी बनी हमारी जिन्दगी,बड़ी भयानक जंग। किस्मत ने लूटा हमें, जैसे कटी पतंग।। १ अधरों पर मुस्कान है, मगर जिंदगी तंग। कदम पर कदम पर चल रही, एक मुसीबत संग।। २... Hindi · दोहा 303 Share लक्ष्मी सिंह 18 Feb 2021 · 1 min read मनमीत 1222 1222 122 चले आओ प्रणय का गीत गाते । अधर पर धोल दो रस प्रीत गाते। मिलन हो फिर नया वरदान पाऊँ, हरो पीड़ा मदन मनमीत गाते। -लक्ष्मी सिंह... Hindi · Quote Writer · मुक्तक 265 Share लक्ष्मी सिंह 17 Feb 2021 · 1 min read पालक . पालक होता है गुणकारी। सुपरफूड है शाकाहारी। हरे रंग का पत्तों वाले। जड़ होती है गुच्छो वाले। भरा हुआ पोषक तत्वों से। तन पोषित करता सत्वों से। प्रचुर आयरन... Hindi · कविता · बाल कविता 1 223 Share लक्ष्मी सिंह 16 Feb 2021 · 1 min read पत्र प्रेमी प्रियतम नाम से, लिखा प्रणय का पत्र। प्रिय वसंत का आगमन, काम उठाया शस्त्र।।१ भेज रहे प्रियवर तुझे, स्नेह निमंत्रण पत्र। दर्शन जल्दी दीजिये, रहे नहीं अन्यत्र।। २ बिछड़ी... Hindi · दोहा · प्रेम · विरह 2 1 247 Share लक्ष्मी सिंह 16 Feb 2021 · 1 min read बंद पंछी 2122 2122 21222 पिंजरे में बंद पंछी सा,तड़पते हम । पंख हैं घायल बदन पर चोट सहते हम। क्या कहूँ किसको बताऊँ कौन है अपना- है बने कैदी मगर अब... Hindi · Quote Writer · मुक्तक 2 408 Share लक्ष्मी सिंह 15 Feb 2021 · 1 min read वृक्ष आधार छंद:-पारिजात 212 212 1222 वृक्ष चारों तरफ लगाना है । भूमि को स्वर्ग सा सजाना है।। वृक्ष को काट भूल मत करना, जान अपनी अगर बचाना है।। साँस लेना... Hindi · ग़ज़ल/गीतिका · पारिजात छंद · वृक्ष 1 1 204 Share लक्ष्मी सिंह 15 Feb 2021 · 1 min read तितली तितली रानी तितली रानी, कौन देश से आई हो। रंग बिरंगे पंख सजीले, कहो कहाँ से लाई हो। सुबह सबेरे आ जाती हो, फूल-फूल पर मँडराती। मीठा-मीठा रस पीती हो,... Hindi · कविता · बाल कविता 1 1 240 Share लक्ष्मी सिंह 15 Feb 2021 · 1 min read करोगे श्रम मनुज जितना आधार छंद-विधाता 1222 1222 ,1222 1222 करोगे श्रम मनुज जितना, बदन पाशान होता है । मिलेगी मुश्किलें जितनी,मगज में जान होता है। उन्हीं को मंजिलें मिलती,रगों में जो जुनूँ रखता,... Hindi · ग़ज़ल/गीतिका · विधाता छंद · श्रम 1 195 Share लक्ष्मी सिंह 15 Feb 2021 · 1 min read अच्छा लगता है प्रियवर पास तुम्हारा आना,अच्छा लगता है। आगे बढ़कर गले लगाना, अच्छा लगता है। जगते उर के कलरव सोये,धड़कन बढ़ जाती- ऐसे में मेरा इतराना, अच्छा लगता है । -लक्ष्मी सिंह... Hindi · Quote Writer · मुक्तक 3 480 Share लक्ष्मी सिंह 14 Feb 2021 · 1 min read पिया अथाह प्यार दूँ । आधार छन्द - "नित" (मापनीयुक्त मात्रिक) मापनी- लगा लगा लगा लगा समान्त- "आर", पदान्त -"दूँ" पिया अथाह प्यार दूँ । वसंत सा सँवार दूँ। प्रथम मिलन उमंग में, निहाल प्राण... Hindi · ग़ज़ल/गीतिका · नित छंद 3 1 216 Share लक्ष्मी सिंह 14 Feb 2021 · 1 min read सिन्धु सबसे ज्यादा सिन्धु को,खुद पर है अभिमान । कश्ती को ले चल उधर, जहाँ अधिक तूफान। जहाँ अधिक तूफान,धैर्य साहस से रहना। लहरों की है घात,थाम के कश्ती रखना। बचपन... Hindi · कुण्डलिया 4 284 Share Previous Page 5 Next