खालीपन आ ठहरा

मेरे ख़ाली कमरे में खालीपन आ ठहरा।
कोलाहल है यादों का, सन्नाटा है गहरा।
भूल न पाऊं मैं कभी,तुम संग बीते पल
आहें मेरी सुने न कोई ,हर शख्स बहरा।
गीत विरह के गाऊं , बैठ अकेले साथी
चाहे साथ नहीं हो , दिल पे तेरा पहरा।
उदास आंखें में अश्क कैसे मैं संभालूं
साथ कोई न दे ,सब देते हैं मशवरा।
दर्द संग जीने की आदत अब हो गयी
छिल जाती है रूह , जिक्र तेरा खुरदरा।
सुरिंदर कौर