कीमत तुम्हें चुकानी होगी

समय निकलता रहता है
पल पल दिन ढलता रहता है
माना तुम्हें अंदेशा न है
क्या तुम पल पल खोते हो
पर कीमत तुम्हें चुकानी होगी ।
माना तू नादान बहुत है
जान बूझकर अंजान बहुत है
सोचता है शिखर चुमना
पर सुलझे उलझन तब न चलना
कीमत तुम्हें चुकानी होगी ।
जीवन क्षणिक होता है अपना
कब है कब नहीं, पता न अपना
क्या इस अनमोल जीवन को
यूं भेड़ चाल में चलने दे
कीमत तुम्हें चुकानी होगी ।
पता तो होता सबकुछ हमें है
पर कुछ न हो पाता हमसे है
जानता हूं जाना, दूर बहुत है
पर कांटों से डर लगता है
कीमत तुम्हें चुकानी होगी ।