यह मुझको मालूम नहीं

यह मुझको मालूम नहीं,
और यह बात तुम मुझसे पूछो भी मत,
क्योंकि सच तुमको भी मालूम है,
कि कल तुम सब मुझसे दूर चले जावोगे,
अगर तुम आज मेरे साथ हो तो इसी कारण,
क्योंकि आज मैं सामर्थ्यवान हूँ ,
मैं आज तुम पर अपनी दौलत लुटा रहा हूँ ,
मैं आज तुम पर अपनी खुशियां लुटा रहा हूँ ,
दिखाकर तुम्हें भविष्य का सुंदर सपना,
दम, उमंग और जोश तुझमें भर रहा हूँ , क्यों ?
यह मुझको मालूम नहीं।
जबकि यह हकीकत मुझको भी पता है,
कि गर नहीं रह सका मैं कल आज की तरह,
क्योंकि मैं जी.आज़ाद हूँ ,
गर मैं उलझ गया किसी काम में,
या तो तुम देखना नहीं चाहोगे मेरी तरफ,
या फिर निकल जावोगे बिना बात किये,
लेकिन ऐसे क्यों ?
यह मुझको मालूम नहीं।
क्यों तुमसे इतना प्रेम रखता हूँ ,
क्यों सिर्फ तुम्हारे सपनें बुनता हूँ ,
और तुम्हारे दुःख देखकर,
क्यों मैं दुःखी हो जाता हूँ ,
वह कौनसा तार है,
जो बना है एक सेतु ,
हम दोनों के बीच में,
कि मैं मानता हूँ तुमको,
अपनी खुशियां और जिंदगी,
यह मुझको मालूम नहीं।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)