*बच्चों की होली (राधेश्यामी छंद)*

बच्चों की होली (राधेश्यामी छंद)
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1)
रंगों की है मधुरिम फुहार, हर ओर दिलों में होली है।
मनभावन पुते हुए मुख हैं, बच्चों की सुंदर टोली है।।
2)
हाथों में पक्के रंग लिए, कुछ दादागिरी दिखाते हैं।
कुछ कोमल चुटकी-भर गुलाल, गालों पर सिर्फ लगाते हैं।।
3)
कुछ के हाथों में शोभित है, छोटी-छोटी-सी पिचकारी।
मन में उमंग-उत्साह लिए, गलियों में टोली यह सारी।।
4)
जो मिला उसे ही रॅंग डाला, छोटा या बड़ा जिसे पाया।
जो कोरा कोई एक मिला, तो बच्चों का मन खिल आया।।
5)
कुछ बच्चों की पिचकारी में, केवल सादा-सा पानी है।
फिर भी यह उनकी होली है, यह उनकी मस्त कहानी है।।
6)
यह दिवस अनोखा होली का, बच्चे त्यौहार मनाते हैं।
सब एक वर्ष में एक बार, रंगों में लिप-पुत जाते हैं।।
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रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज), रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615451