कोई किसी के राज बता,कोई किसी की बात बता दे

कोई किसी के राज बता,कोई किसी की बात बता दे
मेरे अंतरमन की मैं जानू , तेरे मन की तू बात बता दे
क्यू बैचेन पड़ा है अब ,जमाने की इस धूप को लेकर
कैसी मिली सौगात बता दे ,राहों में गुजरी रात बता दे
✍️कवि दीपक सरल