उन नशीली आँखों में डूब जाने का मन होता है…”

उन नशीली आँखों में डूब जाने का मन होता है,
हर लम्हा बस वहीं ठहर जाने का मन होता है।
चमकती हैं जैसे ख़्वाबों की झील में जुगनू,
उनकी गहराइयों में उतर जाने का मन होता है।
लब खामोश हैं, मगर आँखें सब बयां करती हैं,
उन अनकहे अफसानों को सुनने का मन होता है।
जब देखूं उन्हें, तो दुनिया धुंधली-सी लगती है,
सिर्फ उनकी रौशनी में जलने का मन होता है।
जाने क्या जादू है उन मदहोश निगाहों में,
हर घड़ी उन्हीं में खो जाने का मन होता है।
अगर इश्क़ का समंदर उन्हीं आँखों से बहता है,
तो हर बार उन्हीं में डूब जाने का मन होता है।