उल्लाल छंद

उल्लाल छंद
हो विशुद्ध शुभ आचरण
काया आत्मा शुद्ध हो, खान पान न विरुद्ध हो।
नियत सोच निर्दोष हो, उर में सदैव तोष हो।।
नेक सदा व्यवहार हो,जिसे न्याय स्वीकार हो।
करें नहीं मिथ्या वरण,हो विशुद्ध शुभ आचरण।।
जिसका विचार श्रेष्ठ हो,चाहे उम्र न ज्येष्ठ हो।
जिसके अंदर हो दया, सद्गुण लज्जा हो हया।।
स्वार्थ का नहीं आवरण, निर्मल उसका आचरण।
कोटि कोटि उसको नमन, जिसको इन्द्रिय पर दमन।।
नरेंद्र सिंह
21.02.2025