नजर तुम पर रहे रब की

मुबारक हो तुमको यह नववर्ष, नजर तुम पर रहे रब की।
भरे तेरी झोली खुशियों से, और रहमत सदा रहे उसकी।।
मुबारक हो तुमको यह नववर्ष—————————।।
हमसे क्यों दूर हो ऐसे, आवो करीब हमारे तुम।
गले से तुम लिपट जावो, मिलावो हाथ हमसे तुम।।
उसे भूल जावो अब तुम, कल जो गम तुमको मिला।
रोशन होंगे तुम्हारे दिल, ऐसी दुहा है इस दिल की।।
मुबारक हो तुमको यह नववर्ष——————–।।
सजायी है हमने आज, तेरे आने की यह राह।
जलाये हैं हमने दीपक, दिल में तेरी बहुत है चाह।।
यह रंगोली जो बनाई है, सात रंगों का संगम कर।
लगे नहीं तुमको बुरी नजर, चाहत है तू इस दिल की।।
मुबारक हो तुमको यह नववर्ष———————-।।
कभी ना दूर हम तुम हो, ना कभी साथ यह छूटे।
जिन्दा रहे यह दोस्ती, चाहे आपस में हम हो रूठे।।
मुश्किल है तेरे बिन जीना, जिंदगी को अकेले यूँ।
जुदा करें नहीं हमको, मेहरबानी हो यह रब की।।
मुबारक हो तुमको यह नववर्ष———————।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)