Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
27 May 2024 · 1 min read

बर्फ

बर्फ

पानी बर्फ की ठोस अवस्था
गर्मी से बचने की है व्यवस्था
खूब खेले बाल्यावस्था
उपयोग में लाए युवावस्था।
पानी की है ठोस अवस्था

0’Cसे नीचे ताप पर,
जमने की अभिक्रिया।
जल तरल वाष्पित होकर,
बैठ जाता नीचे ठोस बनकर।
पानी की है ठोस अवस्था

बर्फ रखता है सुरक्षित
खाद्य,भोज्य पदार्थ को
सुगम बनाता जलमार्ग को
पारदर्शी ,सफेद अति शोभित।
पानी की है ठोस अवस्था

गर्मी में है शान बढ़ाता
सर्दी में सौंदर्य
हर मौसम में एक – सा
मनोरम लगे जल सा
पानी की है ठोस अवस्था

रचनाकार
संतोष कुमार मिरी
प्रकृति प्रेमी कवि
शिक्षक जिला दुर्ग छत्तीसगढ़

Language: Hindi
226 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Santosh kumar Miri
View all

You may also like these posts

निंद भी उड़ जाती है ...
निंद भी उड़ जाती है ...
Vishal Prajapati
4369.*पूर्णिका*
4369.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
आप और हम जीवन के सच............. हमारी सोच
आप और हम जीवन के सच............. हमारी सोच
Neeraj Kumar Agarwal
"पता नहीं"
Dr. Kishan tandon kranti
*दो दिन फूल खिला डाली पर, मुस्काकर मुरझाया (गीत)*
*दो दिन फूल खिला डाली पर, मुस्काकर मुरझाया (गीत)*
Ravi Prakash
सादगी मुझमें हैं,,,,
सादगी मुझमें हैं,,,,
पूर्वार्थ
असत्य पर सत्य की जीत तभी होगी जब
असत्य पर सत्य की जीत तभी होगी जब
Ranjeet kumar patre
*मां*
*मां*
Dr. Priya Gupta
गुलामी के पदचिन्ह
गुलामी के पदचिन्ह
मनोज कर्ण
सफर में हमसफ़र
सफर में हमसफ़र
Atul "Krishn"
कोहरा काला घना छट जाएगा।
कोहरा काला घना छट जाएगा।
Neelam Sharma
तनातनी
तनातनी
Laxmi Narayan Gupta
यूँ तो...
यूँ तो...
हिमांशु Kulshrestha
देखेगा
देखेगा
सिद्धार्थ गोरखपुरी
कहते हो इश्क़ में कुछ पाया नहीं।
कहते हो इश्क़ में कुछ पाया नहीं।
Manoj Mahato
तमन्ना
तमन्ना
Annu Gurjar
उसी वक़्त हम लगभग हार जाते हैं
उसी वक़्त हम लगभग हार जाते हैं
Ajit Kumar "Karn"
शुभ प्रभात
शुभ प्रभात
Rambali Mishra
प्रेम में सफलता और विफलता (Success and Failure in Love)
प्रेम में सफलता और विफलता (Success and Failure in Love)
Acharya Shilak Ram
हमेशा की नींद सुला दी गयी
हमेशा की नींद सुला दी गयी
Prithvi Singh Beniwal Bishnoi
कुछ नमी अपने साथ लाता है ।
कुछ नमी अपने साथ लाता है ।
Dr fauzia Naseem shad
वो हक़ीक़त थी, जिसे ठुकरा गया तू,
वो हक़ीक़त थी, जिसे ठुकरा गया तू,
Kalamkash
दोहा
दोहा
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
हैं सितारे डरे-डरे फिर से - संदीप ठाकुर
हैं सितारे डरे-डरे फिर से - संदीप ठाकुर
Sandeep Thakur
ये दिल न मेरा लग रहा
ये दिल न मेरा लग रहा
कविराज नमन तन्हा
आज यानी 06 दिसंबर अर्थात 05 शताब्दीयो से भी ज्यादा लम्बे काल
आज यानी 06 दिसंबर अर्थात 05 शताब्दीयो से भी ज्यादा लम्बे काल
ललकार भारद्वाज
Below the earth
Below the earth
Shweta Soni
मैं तुम और हम
मैं तुम और हम
Ashwani Kumar Jaiswal
बेटियाँ
बेटियाँ
Mamta Rani
नेता, अफसर और बिल्डर
नेता, अफसर और बिल्डर
Dhirendra Singh
Loading...