Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
13 May 2024 · 1 min read

ग़ज़ल-सपेरे भी बहुत हैं !

गो ज़हर भरे नागों के डेरे भी बहुत हैं
पर अपने इलाके में सपेरे भी बहुत हैं

माना के सियह रात है क़ाबिज़ हैं अँधेरे
हर रात के आँचल में सवेरे भी बहुत हैं

तू सोच ले अंजाम अदावत का बुरा है
तेरे हैं बहुत लोग तो मेरे भी बहुत हैं

अब राम ही जाने कि कहाँ राम खो गऐ
अवतार भी लाखों हैं लुटेरे भी बहुत हैं

गर चाँद नहीं चाँद की तस्वीर ही ला दो
है रात अमावस की अँधेरे भी बहुत हैं

कागज़ पे लिखे क़िस्से जलाए हैं कई बार
दिल पे तेरे अफ़साने उकेरे भी बहुत हैं

बस आदमी मिलता नहीं ढूँढ़े से भी ‘शाहिद’
कहने को बड़ा शहर बसेरे भी बहुत हैं

1 Like · 88 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.

You may also like these posts

पढी -लिखी लडकी रोशन घर की
पढी -लिखी लडकी रोशन घर की
Swami Ganganiya
मेरी जो बात उस पर बड़ी नागवार गुज़री होगी,
मेरी जो बात उस पर बड़ी नागवार गुज़री होगी,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
धनुष वर्ण पिरामिड
धनुष वर्ण पिरामिड
Rambali Mishra
सहकारी युग का 13 वां वर्ष (1971- 72 )
सहकारी युग का 13 वां वर्ष (1971- 72 )
Ravi Prakash
''ये बरसों का सफ़र है हमारे माँ बाप का''
''ये बरसों का सफ़र है हमारे माँ बाप का''
शिव प्रताप लोधी
*लक्ष्य हासिल हो जाएगा*
*लक्ष्य हासिल हो जाएगा*
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
बेटियां / बेटे
बेटियां / बेटे
Mamta Singh Devaa
*मनः संवाद----*
*मनः संवाद----*
रामनाथ साहू 'ननकी' (छ.ग.)
मोहब्बत का हुनर
मोहब्बत का हुनर
Phool gufran
वादा करके तोड़ती, सजनी भी हर बार
वादा करके तोड़ती, सजनी भी हर बार
RAMESH SHARMA
चचहरा
चचहरा
कुमार अविनाश 'केसर'
क्या हुआ की हम हार गए ।
क्या हुआ की हम हार गए ।
अश्विनी (विप्र)
दबी दबी आहें
दबी दबी आहें
Shashi Mahajan
https://vin777.contact/
https://vin777.contact/
VIN 777
हम एक-दूसरे के लिए नहीं बने
हम एक-दूसरे के लिए नहीं बने
Shekhar Chandra Mitra
घृणा के बारे में / मुसाफ़िर बैठा
घृणा के बारे में / मुसाफ़िर बैठा
Dr MusafiR BaithA
दर्शक की दृष्टि जिस पर गड़ जाती है या हम यूं कहे कि भारी ताद
दर्शक की दृष्टि जिस पर गड़ जाती है या हम यूं कहे कि भारी ताद
Rj Anand Prajapati
धनवान बनने के लिए एक-एक कण का संग्रह करना पडता है और गुणवान
धनवान बनने के लिए एक-एक कण का संग्रह करना पडता है और गुणवान
ललकार भारद्वाज
मित्र दिवस पर आपको, सादर मेरा प्रणाम 🙏
मित्र दिवस पर आपको, सादर मेरा प्रणाम 🙏
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
हरसिंगार
हरसिंगार
Shweta Soni
मुक्तक
मुक्तक
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
अजब तेरी दुनिया
अजब तेरी दुनिया
Mukund Patil
पंचतत्व का परमतत्व में विलय हुआ,
पंचतत्व का परमतत्व में विलय हुआ,
Anamika Tiwari 'annpurna '
मेरा भगवान तेरा भगवान
मेरा भगवान तेरा भगवान
Mandar Gangal
सफलता
सफलता
Dr. Pradeep Kumar Sharma
2891.*पूर्णिका*
2891.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
गम जरूरी है
गम जरूरी है
पूर्वार्थ
"पारंपरिक होली और भारतीय संस्कृति"
राकेश चौरसिया
दर्द की नदी जैसे बहते रहे हम,
दर्द की नदी जैसे बहते रहे हम,
रश्मि मृदुलिका
..
..
*प्रणय प्रभात*
Loading...