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14 Jun 2023 · 1 min read

****🙏🏻आह्वान🙏🏻****

****** आह्वान *******

क्यों मौन खड़े हे कर्णधार!
क्यों पाप पनपने देते हो।
हे पार्थ ! उठो थामो तूणीर,
क्यों आग भड़कने देते हो॥

सत्ता सिंहासन की खातिर,
न भीष्म बनो, न द्रोण बनो।
शकुनी की कुटिल चाल में फंस,
धृतराष्ट्र कृपा सम मौन बनो॥
सुन लो कुछ बात विदुर की भी,
जिनको न तबज्जो देते हो ।
हे पार्थ ! उठो थामो तूणीर,
क्यों आग भड़कने देते हो॥1॥

हे कर्मवीर! तुम धर्मराज सम,
द्यूत प्रिय मत बन जाओ।
न बनो शल्य या कर्ण भांति,
जो जान के भी दुर्गति पाओ॥
सुनकर गीता के वचनों को,
क्यों श्रवण बंद कर लेते हो।
हे पार्थ ! उठो थामो तूणीर,
क्यों आग भड़कने देते हो ॥2॥

कश्मीर में था आतंक जो कल,
अब दिल्ली में वह दिखता है।
जन धन की कालिख बना – बना,
अपने पापों को लिखता है॥
‘अंकुर ‘ है राष्ट्र ही सर्वोपरि,
क्यों बात भुला यह देते हो।
हे पार्थ ! उठो थामो तूणीर,
क्यों आग भड़कने देते हो॥3॥

-✍️ निरंजन कुमार तिलक ‘ अंकुर ‘
जैतपुर, छतरपुर मध्यप्रदेश

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