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17 Apr 2024 · 1 min read

“हाशिये में पड़ी नारी”

“हाशिये में पड़ी नारी”
हर युग में सीता बसती
हर युग में राम,
क्यों कहें रावण को राक्षस
जब सब्र भरे तमाम?
अब वन में न जाती सीते
घर में ही जल जाती,
द्रौपदी पाण्डव बीच न बँटती
दहेज में जल जाती।

1 Like · 1 Comment · 35 Views
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