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10 Mar 2023 · 1 min read

💐प्रेम कौतुक-396💐

हर इक बात की शक़्ल बदल जाती हैं बे-एतिबार में,
हम जीते रहे बहुत जीते रहे उनके बा-एतिबार में,
आख़िर क़िल्लत कहाँ किस जग़ह रह गई दिल में,
बड़ा अफ़सोस हो रहा है क़ाबिल-ए-ए’तिबार में।

©®अभिषेक: पाराशरः “आनन्द”

Language: Hindi
488 Views
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