Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
4 Feb 2024 · 1 min read

भूखे हैं कुछ लोग !

भूखे हैं कुछ लोग
देश, समाज के
पहिचान, स्वाभिमान
बचाने के जुनून मे
परन्तु भावनाओं के
गहरे दहलीज पर
दिगभ्रमित करनेवाला भीड
गला उसके रेटती है ।

भूखे है कुछ लोग
अपनी, सिर्फ अपने
प्रचार, विचार
प्रवाहित करने के अंधता मे
आत्मकेन्द्रितविमूढ
पदीय गरिमा भूलकर
प्रचाररति के आत्मरति मे
गला वह खूद रेटती है ।

भूखे हैं कुछ लोग
खूद की व्यापार
चमकाने, धन कमाने मे
नैतिकता को सुलि चढा
शहिदों के खून भी
पिने को उतारू वह
अपने कालेकुर्तूत मिटाने
आमजनों की भावना का गला रेटती है ।

#दिनेश_यादव
काठमाण्डू (नेपाल) #Hindi_Poetry #हिन्दी_कविता

Language: Hindi
1 Like · 78 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
View all
You may also like:
यूं ही कह दिया
यूं ही कह दिया
Koमल कुmari
आज सभी अपने लगें,
आज सभी अपने लगें,
sushil sarna
परिवार का सत्यानाश
परिवार का सत्यानाश
पूर्वार्थ
किसान आंदोलन
किसान आंदोलन
मनोज कर्ण
*मौत सभी को गले लगाती (हिंदी गजल/गीतिका)*
*मौत सभी को गले लगाती (हिंदी गजल/गीतिका)*
Ravi Prakash
कितनी आवाज़ दी
कितनी आवाज़ दी
Dr fauzia Naseem shad
यूँही तुम पर नहीं हम मर मिटे हैं
यूँही तुम पर नहीं हम मर मिटे हैं
Simmy Hasan
माता की चौकी
माता की चौकी
Sidhartha Mishra
स्वयं का न उपहास करो तुम , स्वाभिमान की राह वरो तुम
स्वयं का न उपहास करो तुम , स्वाभिमान की राह वरो तुम
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
चोर उचक्के बेईमान सब, सेवा करने आए
चोर उचक्के बेईमान सब, सेवा करने आए
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
आदमी और मच्छर
आदमी और मच्छर
Kanchan Khanna
‘ विरोधरस ‘---3. || विरोध-रस के आलंबन विभाव || +रमेशराज
‘ विरोधरस ‘---3. || विरोध-रस के आलंबन विभाव || +रमेशराज
कवि रमेशराज
वक्त
वक्त
Ramswaroop Dinkar
कुछ भी होगा, ये प्यार नहीं है
कुछ भी होगा, ये प्यार नहीं है
Anil chobisa
*****रामलला*****
*****रामलला*****
Kavita Chouhan
सावन और स्वार्थी शाकाहारी भक्त
सावन और स्वार्थी शाकाहारी भक्त
Dr MusafiR BaithA
"आखिर में"
Dr. Kishan tandon kranti
फागुन की अंगड़ाई
फागुन की अंगड़ाई
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
हमारी काबिलियत को वो तय करते हैं,
हमारी काबिलियत को वो तय करते हैं,
Dr. Man Mohan Krishna
कैसे हमसे प्यार करोगे
कैसे हमसे प्यार करोगे
KAVI BHOLE PRASAD NEMA CHANCHAL
ग़ज़ल
ग़ज़ल
ईश्वर दयाल गोस्वामी
* गीत कोई *
* गीत कोई *
surenderpal vaidya
#संवाद (#नेपाली_लघुकथा)
#संवाद (#नेपाली_लघुकथा)
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
सूने सूने से लगते हैं
सूने सूने से लगते हैं
Er. Sanjay Shrivastava
एक बार फिर...
एक बार फिर...
Madhavi Srivastava
गरीबी……..
गरीबी……..
Awadhesh Kumar Singh
कर्मठ व्यक्ति की सहनशीलता ही धैर्य है, उसके द्वारा किया क्षम
कर्मठ व्यक्ति की सहनशीलता ही धैर्य है, उसके द्वारा किया क्षम
Sanjay ' शून्य'
...........
...........
शेखर सिंह
मेरी माँ
मेरी माँ
Pooja Singh
■ एक होते हैं पराधीन और एक होते हैं स्वाधीन। एक को सांस तक ब
■ एक होते हैं पराधीन और एक होते हैं स्वाधीन। एक को सांस तक ब
*Author प्रणय प्रभात*
Loading...