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7 Apr 2017 · 1 min read

🚩उन बिन, अँखियों से टपका जल।

🧿
उन बिन,अँखियों से टपका जल।
अमल कपोलों पर अटका जल।

🧿
घन गरजे , चमकी बिजली तो,
झटका लगा, हृदय खटका जल।

🧿
आई आहट ,आँख गढ़ गई।
मुस्काया, उरमय घट का जल।

🧿
कोउ और है,पुनः करुण रस-
रूपी मन बन ,पुनि भटका जल।

🧿
सारी रात, जागते बीती।
तरस गए दृग- घूँघट-काजल।

🧿
कान्हा तेरी चतुर चाल से
विवस हुई,मन पिय- घट का जल।

——————————————

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता।

💙उक्त रचना को “पं बृजेश कुमार नायक की चुनिंदा रचनाएं” कृति के द्वितीय संस्करण के अनुसार परिष्कृत किया गया है।

💙”पं बृजेश कुमार नायक की चुनिंदा रचनाएं” कृति का द्वितीय संस्करण अमेजोन और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है।

3 Likes · 1 Comment · 530 Views
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