जब एक शख्स लगभग पैंतालीस वर्ष के थे तब उनकी पत्नी का स्वर्गव
ख़ुद अपने दिल के अंदर झांकता होगा,
विपक्षी दलों की आंखों में है खराबी ,
चांद पर पहुंचे बधाई,ये बताओ तो।
जिंदगी के आईने को चश्मे से देखा मैंने,
*मनः संवाद----*
रामनाथ साहू 'ननकी' (छ.ग.)
वक्त ये बदलेगा फिर से प्यारा होगा भारत ,
हैं राम आये अवध में पावन हुआ यह देश है
वह प्रेम तो उससे करती, पर विवाह न करती
"" *एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य* "" ( *वसुधैव कुटुंबकम्* )
कई बचपन की साँसें - बंद है गुब्बारों में
जोख़िम दग़ा का अज़ीज़ों से ज़्यादा
Ghazal
shahab uddin shah kannauji
तिरंगा लहराता हुआ झंडा अपना अभिमान है।
"बेपेंदी का लोटा" रखने वालों को यह इल्म होना चाहिए कि उसके ल
সব মানুষের মধ্যেই ভগবান আছেন