मतलब की दुनिया में सब खो गए,अपने ही स्वार्थों में संजो गए।

मतलब की दुनिया में सब खो गए,अपने ही स्वार्थों में संजो गए।
जहाँ तक रहा फायदा किसी को,वही तक थे अपने, वही तक संजोए।
बातों की गहराई को जो समझे,वही तो सच्चे इंसान हैं।
वरना मतलब की इस दुनिया में,हर कोई बस एक मेहमान है।
कुछ लफ्ज़ कहे, कुछ अनकहे,कुछ बातों में छुपे इशारे थे।
जो पढ़ सके इन खामोशियों को,वही दिल के सच्चे प्यारे थे।
मतलब से परे जो प्यार करे,बिन स्वार्थ जो साथ चले।
ऐसे ही लोग इस दुनिया में,दिल की गहराइयों तक बस चले।
बातों के अर्थ समझो अगर,तो जीवन का सार मिलेगा।
वरना मतलब की भीड़ में बस,एक और चेहरा ही खड़ा मिलेगा।