चैत्र नवरात्रि की शुरुआत है

आया है हमारा नव वर्ष,
देखो लेकर उत्साह अपार।
खिली खिली है बसंत ऋतु ,
और अन्न से भरे है भंडार।।
चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा आज ।
नए संवत का हो रहा आगाज़।।
दो हजार बयासी है संवत,
सिद्धार्थी है जिसका नाम ।
सूर्य देव बने है मंत्री राजा,
शनि देव पर न्याय का काम।।
चैत्र नवरात्रि की शुरुआत है।
देखो कितनी सुंदर यह बात है।।
यह हमारा पावन पवित्र साल है,
मंदिर मंदिर में हर्ष उल्लास है ।
शंख ध्वनि और घंटी की गूंज है,
वर्ष हमारा यह सबसे खास है ।।
आओ मिलकर मनाए हर्ष।
आया है विक्रम संवत वर्ष।।
इस दिन हुआ सृष्टि निर्माण,
बच्चा बच्चा यह जान ले।
स्वागत को तत्पर ऋतु बसंत,
कोयल कूक रही नव गान ले।।
खिल रहे चहुंओर रंग बिरंगे फूल ।
आओ गले मिले भुलाकर हर शूल।।
—- जेपीएल