*मेरे मौत पर* !
मेरे मौत पर आंसू न बहाना,
हो सके तो जश्न मनाना,
ये तो मेरा अंत नहीं,
नए जन्म का है बहाना,
मेरे मौत पर आंसू….
जो गिरे आंसू की दो बूंदें,
उन्हें प्यार से समझना,
आया है जो इस जहां में,
एक दिन उसे भी है जाना,
मेरे मौत पर आंसू….
जीवन के इस रंग मच पर,
अभिनय का था अवसर,
हर किरदार में उतर कर,
किरदार को निभाया।।
मेरे मौत पर आंसू….
विछोह के अथाह सागर में,
उम्मीदों की पतवार चलाना,
हिचकोले खाए जितना भी,
निरंतर आगे बढ़ते जाना,
मेरे मौत पर आंसू….
“कर्म की इस यात्रा में,
जो बोया, वही पाया।
हर खुशी, हर ग़म को मैंने,
समझ के साथ अपनाया।”
मेरे मौत पर आंसू….
यदि दिया मैने है कुछ भी,
तो ये कर्तव्य था हमारा,
प्यार के जो बीज बोएं,
वही अस्तित्व है हमारा,
मेरे मौत पर आंसू….
“विहल”✍️✍️✍️