प्रकृति बचाओ

नव चौपाला छंद प्रकृति बचाओ
यह नवीन चौपाला छंद मेरे द्वारा ही सृजित किया गया है।जिसके प्रत्येक चरण में 18-18मात्रा होती है तथा चरणान्त में चौकल अनिवार्य है।।
बढ़ी बहुत मानव की मनमानी।
नित्य उजाड़े वो प्रकृति सुहानी।।
नव विकास ने सबको भरमाया।
भाव लोभ का है कुटिल जगाया।।
रुखी सूखी अब वसुधा सारी।
बढ़ा प्रदूषण है कितना भारी।।
सड़क भवन नित-नित बढ़ते जाते।।
वन उपवन निशदिन घटते जाते।।
रोग बहुत से नित बढ़ते जाते।
जिससे प्राणी जनगण घबराते।।
अस्त व्यस्त देखो वसुधा पूरी।
प्रकृति बचाना अब बहुत जरूरी।।
आज शपथ यह हम सभी उठाएँ।
प्रकृति रम्यता को हम लौटाएँ।।
वृक्षारोपण सत पथ अपनाएँ।
सकल सृष्टि का अस्तित्व बचाएँ।।
डॉ ओम प्रकाश श्रीवास्तव ओम
कानपुर नगर