जो न आ सको

जो न आ सको
अपनी तस्वीर भेज देना,
चंद लफ्जों में
झूठ ही सही
इश्क़ की तहरीर भेज देना।
जो होता मेरे साथ
मेरा हमसफर
तो कोई दर्द न था,
अब दूर है तो क्या
तू हँसता रहे
हमें अपनी पीर भेज देना।
लाइलाज है ख़्वाहिशें
तुझसे मिलने की,
अपना साथ न दे सके
तो क्या, एक तहरीर भेज देना
अंजाम-ए-इश्क़
ऐसा होगा
सोचा भी न था कभी,
सुकूँ मिल सके मेरी बेचैनियों को
ऐसी तदबीर भेज देना….!!!!
हिमांशु Kulshrestha