इन दिनों कुछ समझ में नहीं आ रहा है जिंदगी मुझे कहा ले जा रही
इन फूलों से सीख ले मुस्कुराना
ठाकुर प्रतापसिंह "राणाजी "
क्यों छोड़ चला यूंही मझधार में कन्हैया
यूँ भी हल्के हों मियाँ बोझ हमारे दिल के
( सब कुछ बदलने की चाह में जब कुछ भी बदला ना जा सके , तब हाला
उत्तेजना🤨 और क्रोध😡 में कहा गया शब्द और किया गया कर्म स्थिति
बेहद खुशनुमा और हसीन से हो गए हैं ये दिन।
दिल को लगाया है ,तुझसे सनम , रहेंगे जुदा ना ,ना बिछुड़ेंगे
भारत की गौरवभूमि में जन्म लिया है
।। श्री सत्यनारायण ब़त कथा महात्तम।।
मैं तुम्हें लिखता रहूंगा
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
"Life has taken so much from me that I'm no longer afraid. E