अनीति का प्रचार

अनीति का प्रचार
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अनीति का प्रचार व्यापार बने फिर
प्रलयकाल का यह आमंत्रण होगा,
ब्रह्मांड के अविरल कालखंड पर
यह विध्वंस का मौन अभ्यर्थन होगा..
साड़ी में लिपटी सनातन परम्परा है
नारी श्रद्धा का नहीं अनावरण होगा,
द्विअर्थी गानों संग अर्धनग्न रीलों से
मानव जीवन का तो बस क्षरण होगा..
शुभ-कर्मों का नहीं हुआ संवर्धन
मर्त्य लोक में तन विचरण को आया,
फिर भी तेरा मन ,न हुआ अनिंद्य तो
ये चंचल मन बस अवचेतन होगा..
सुनो आधुनिकता कान खोल कर
मर्यादा ही तेरा जीवन आदर्श है,
मर्यादित जीवन यदि नहीं जी रहा
तेरा मरण भी नहीं प्राणपण होगा..
अर्द्धनग्न शरीर और अश्लीलता का
गवाह बना है ये सोशल मीडिया ,
कोरोना से प्रभु ने दिया संदेश था
फिर महाकाल का भूतभावन होगा..
मौलिक और स्वरचित
सर्वाधिकार सुरक्षित
© ® मनोज कर्ण
कटिहार ( बिहार )
तिथि – १२/०३/२०२५
फाल्गुन ,शुक्ल पक्ष, त्रयोदशी तिथि ,बुधवार
विक्रम संवत २०८१
मोबाइल न. – 8757227201