या तो होते हैं पागल लोग ऐसे

या तो पागल है लोग ऐसे, या होते हैं फिर ऐसे शैतान।
कहते हैं खुद को पीर, या कहते हैं खुद को भगवान।।
या तो पागल है लोग ऐसे———————–।।
औरों की बुराई करते हैं, क्या काम बुरे ये करते नहीं।
कहते हैं अंधा औरों को, क्या ठोकर किसी को ये देते नहीं।।
लेकिन ये बताते नहीं खुद को, कभी पापी और झूठा इंसान।
कहते हैं खुद को पीर, या कहते हैं खुद को भगवान।।
या तो पागल है लोग ऐसे———————।।
क्या मतलब है हरमों से इन्हें, ये क्यों है दीवाने हुर्रों के।
क्यों जाते हैं मधुशाला ये, क्यों प्यासे हैं ऐसे हुस्नों के।।
परदे में छुपाकर सच को ये, खुद को दिखाते हैं ये महान।
कहते हैं खुद को पीर, या कहते हैं खुद को भगवान।।
या तो पागल है लोग ऐसे———————-।।
ये बीज जमीं में नफरत के, बोते हैं क्यों आखिर ऐसे।
क्यों बांट रहे हैं देश को ये, जाति-धर्मों में बंटकर ऐसे।।
कहते हैं जिसे सब गद्दारी, कहते हैं उसे ये अपना ईमान।
कहते हैं खुद को पीर, या कहते हैं खुद को भगवान।।
या तो पागल है लोग ऐसे———————।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)