भाषा

वो मजबूर था
लोगों को प्यार करता था
ग़ैरों की ख़ुशी में झूम उठता था
गणित नहीं समझता था
फिर भी ब्रह्मांड की भाषा समझता था ।
—शशि महाजन
वो मजबूर था
लोगों को प्यार करता था
ग़ैरों की ख़ुशी में झूम उठता था
गणित नहीं समझता था
फिर भी ब्रह्मांड की भाषा समझता था ।
—शशि महाजन