भीड़ में आके, किसने घेरा है

ग़ज़ल
दिनांक _ 21/2/25….🥰
भीड़ में आके, किसने घेरा है,
सिर्फ़ यादों ,का ही बसेरा है ।1/
रूठता वो ,जिसे मुहब्बत हो,
वरना चारों तरफ़ , अँधेरा है ।2/
गूंजता जब भी शोर ,कानों में,
चीख़ती रात ,फिर सवेरा है ।3/
कौन आवाज़ , दे रहा मुझको ,
क्या सदाओं में , हुस्न तेरा है ।4/
लूट लेता है , जान मेरी भी ,
लोग कहते हैं , वो लुटेरा है ।5/
चाँदनी दिन में , धूप रातों में ,
दिल उड़ा जा रहा , ठठेरा है ।6/
हक़ जताने ,वो आ गया तन्हा ,
उस ने ही नूर को , बिखेरा है ।7/
रौशनी डालता , वहीं अकसर ,
जिस जगह ‘नील’ का भी डेरा है ।8/
✍️नील रूहानी ( नीलोफर खान)