नहीं कोई कमी हम में

नहीं कोई कमी हम में, नहीं है कम हम भी तुमसे।
तुम्हारी तरह ही बहुत अभिमान, जिन्दा है हम में।।
हमारे पास क्या नहीं है, बताओ तुम जरा हमको।
दौलत नहीं तो क्या हुआ, सागर सा दिल है पास में।।
नहीं कोई कमी हम में——————————।।
लतीफा नहीं इसे समझो, ना समझो कोई झूठा किस्सा।
चाहे कपड़ें नहीं है अच्छे, मगर दिल तो है तुमसे अच्छा।।
अगर नहीं है हमारे पास, गाड़ी-घोड़ा और महल।
नहीं कोई गम हमें फिर भी, जिन्दा दिल तो है पास में।।
नहीं कोई कमी हम में—————————–।।
माना कि कोई कारवां, लेकर चलते हो हुर्रों का।
नहीं मतलब हमारे लिए, इन हसीन चेहरों का।।
बहुत संतोष है हमको, चैन से हम सोते हैं।
नहीं बेकार ऐसा कोई, सामान हमारे पास में।।
नहीं कोई कमी हम में————————-।।
हमारे पास है ईमान, शराफत और यह तहजीब।
हराम की हम नहीं खाते, मेहनत हमारा है नसीब।।
हाँ, हमारे पास नहीं है, तुम्हारे जैसा पापी मन।
बाकी तुमसे ज्यादा है, इज्जत भी हमारे पास में।।
नहीं कोई कमी हम में————————-।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)